नि:शुल्क कैंसर जांच शिविर में 178 मरीजों की हुई जांच

कैंसर निदान और उपचार सेवाओं की सुलभता आवश्यक

गोरखपुर के हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर अस्पताल एवं शोध संस्थान, गीता वाटिका द्वारा नि:शुल्क कैंसर की प्राथमिक जांच एवं प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर  मंगलवार को सदर चिकित्सालय, बस्ती में आयोजित हुआ, जिसमें सुबह 10:00 बजे से शाम 3:00 बजे तक 178 लोगों ने अपनी विभिन्न शारीरिक परेशानियों की जांच कराई।  


महिलाओं में स्तन और गर्भाशय कैंसर की जांच प्रमुख 

इस शिविर में अधिकांश महिलाओं ने स्तन, गर्भाशय और मुंह के कैंसर की जांच कराई, जबकि पुरुषों ने मुंह और गले की परेशानी, कमर व पैर के दर्द, पाचन और पेशाब से संबंधित समस्याओं की जांच कराई।  

विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा परामर्श एवं उपचार

अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सी. पी. अवस्थी और डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने सभी मरीजों की जांच की और उन्हें उचित परामर्श दिया। कैंसर के लक्षणों और उनके प्रकारों की विस्तृत जानकारी दी गई। मरीजों को उनकी आवश्यकता के अनुसार नि:शुल्क दवाएं भी वितरित की गईं।  

कैंसर जागरूकता अभियान के तहत दी गई महत्वपूर्ण जानकारियां

डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने कैंसर से बचाव और समय पर सही उपचार के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि स्तन कैंसर का इलाज ऑन्कोसर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, हार्मोनल थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी विधियों से किया जाता है।  

शिविर प्रबंधक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसे शिविरों का मुख्य उद्देश्य लोगों को कैंसर से बचाव और इलाज के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने बताया कि यदि स्तन कैंसर का इलाज बंद करने के बाद 6 महीने से 2 साल तक पुनरावृत्ति नहीं होती, तो महिलाएं गर्भधारण का प्रयास कर सकती हैं।

तंबाकू और शराब से बचाव की दी गई सलाह

कैंसर से बचने के लिए तंबाकू, गुटका, खैनी, धूम्रपान, शराब आदि से दूर रहने की सलाह दी गई। महिलाओं को स्तन और गर्भाशय की नियमित जांच कराने की भी सलाह दी गई।  

सूचना सामग्री का वितरण

शिविर में उपस्थित लोगों को IEC (सूचना, शिक्षा और संचार) सामग्री जैसे पत्रक, पुस्तिकाएं, फ्लिपबुक, पोस्टर, लीफलेट आदि वितरित किए गए, ताकि वे अपने क्षेत्र में जागरूकता फैला सकें।  

शिविर में डॉक्टरों का सराहनीय योगदान

शिविर में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विकास सोनकर, डॉ. नरेश अग्रवाल, डॉ. जी. एम. शुक्ला, डॉ. राकेश श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव सहित अन्य चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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